Uchcharan flexible Secrets
ओम नमो आदेश गुरु का। गिरह-बाज नटनी का जाया, चलती बेर कबूतर खाया, पीवे दारू खाय जो मांस, रोग-दोष को लावे पांस। कहां-कहां से लावेगा ? गुदगुद में सुद्रावेगा, बोटी-बोटी में से लावेगा, चाम-चाम में से लावेगा, नौ नाड़ी बहत्तर कोठा में से लावेगा, मार-मार बंदी कर लावेगा। न लावेगा तो अपनी माता की सेज पर पग रखेगा। मेरी भक्ति गुरु की शक्ति, फुरो मंत्र ईश्वरी वाचा।
जप शुरु करने से पहले अपनी रक्षा अवश्य करें।
ब्रह्मचर्य व्रत का पूर्ण रूप से पालन करें।
प्राचीन तंत्र शास्त्रों पर विश्वास कर साधना करें ।
आदिनाथ कैलास निवासी, उदयनाथ काटे जम फांसी। सत्यनाथ सारणी संत भाखे, संतोषनाथ सदा संतन की राखे। कन्थडिऩाथ सदा सुख दायी, अचती अचम्भेनाथ सहायी।ज्ञान पारखी सिद्ध चौरंगी, मच्छेन्द्रनाथ दादा बहुरंगी।गोरखनाथ सकल घट व्यापी, काटे कलिमल तारे भव पीड़ा। नव नाथों के नाम सुमिरिये, तनिक भस्मि ले मस्तक धरिये। रोग शोक दारिद्र नशावे, निर्मल देह परम सुख पावे। भूत प्रेत भय भञ्जना, नव नाथों के नाम। सेवक सुमिरे चन्द्रनाथ, पूर्ण होय सब काम।
मंत्र जप के दौरान अनुशासन:- मंत्र जाप करते समय मन को एकाग्र रखें। झूठ, क्रोध अथवा किसी भी चिंता से दूर रहें। साधना के दौरान धूम्रपान या अन्य नशा करना भी वर्जित है।
❤ इसे और लोगो (मित्रो/परिवार) के साथ शेयर करे जिससे वह भी जान सके और इसका लाभ पाए ❤
तंत्र मंत्र स्मरण शक्ति के लिए मंत्र : स्मरण शक्ति को कैसे तेज़ करे?
साधना के लिए एक निश्चित समय और स्थान का पालन करें।
इसके बाद जब सूर्य ग्रहण खत्म हो जाए तब आपने जो भी कपड़े पहने website हुए हैं उसी के साथ जाकर पानी से स्नान कर ले. इस तरह सूर्य ग्रहण की अवधि में आपके द्वारा जाप किए गए साबर मंत्र का असर होने लगेगा और उसकी सिद्धि हो जाएगी, सिद्ध होने के बाद आप साबर मंत्र का इस्तेमाल दूसरों की भलाई के लिए कर सकते हैं.
इस मंत्र की खासियत ये हे की इस मंत्र को सिद्ध करके आप किसी कन्या के कान में मंत्र फूककर उसीसे सारे सवाल का जवाब ले सकते हे अगर किसी पर काला जादू हुआ हे या किया कराया हे तो आपको ये सिद्धि बहुत फलदायी साबित होती हे,ये शाबर मंत्र साधना हे और बहुत ही उपयोगी साधना हे जो लोग गद्दी लगाते हे और दुसरे के दुःख को दूर करते हे उस व्यक्ति को ये सिद्धि अवश्य करनी चाहिए,
साधना काल में धूम्रपान या कोई अन्य नशा आदि न करें।
साधना शान्त, नियत स्थान पर एकांत में ही करें।
भोजन और आहार में संयम:- साधना के दौरान मांस, मदिरा और अन्य तामसिक पदार्थों का त्याग करें। सात्विक आहार ग्रहण करें।